
आ गये मेरी मौत का तमाशा देखने… अब मुझे लटका देंगे, जुबान ऐसी बाहर आयेगी, आँखे बाहर आएंगी… थोडी देर लटकता रहुँगा, फिर ये मेरा भाई मुझे नीचे उतारेगा… फिर आप चर्चा करते घर चले जाओगे, खाना खाओगे, सो जाओगे.
क्रांतिवीर
एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना देता है… साला एक मच्छर! सिस्टम इतना करप्ट है की, इमानदार आदमी को भी चोर बना देता है!
यशवंत
राजनीती में फैसले सही या गलत नही होते… फैसले होते है… उन्हे वक्त और हालात के हिसाब से लिया जाता है.
राजनीती
ये दुःख नाम की बिमारी का इलाज डॉक्टर के पास नहीं है… इसका इलाज खुद को ढूँढना पडता है, दुःख को भूलना पडता है.
परिंदा
इस दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं… एक वो जो खुद के लिए जीते हैं, और दुसरे वो जो दुसरों के लिए जीते हैं.
अब तक छप्पन
अपना तो उसूल है…
पहले लात, फिर बात,
उसके बाद मुलाकात!
तिरंगा
कभी कभी दिल की आवाज सुनने के लिए तुम्हें अपनी इज्जत और अपने डर को दरकिनार करना पडता है.
वजूद





























































